Devdhara Watarfall jalprapat देवधारा जलप्रपात सुंदरता और प्रकृति की अनोखी दृश्य ।

Devdhara Watarfall jalprapat देवधारा जलप्रपात सुंदरता और प्रकृति की अनोखी दृश्य ।

देवधारा जलप्रपात devdhara Watarfall

देवधारा जलप्रपात


छत्तीसगढ़ वन्य जीवों की विविधताओं एवं सुंदरता से भरा हुआ है, यहां की छोटी-छोटी नदी नाले बरसात के दिनों में छत्तीसगढ़ की शोभा बढ़ाती है। देवधारा जलप्रपात छत्तीसगढ़ प्रदेश की शोभा बढ़ाने में पिछे नहीं है। घने जंगलों के बीच कल-कल करती आवाज और पंछियों की चहचहाहट भरी सुमधुर आवाजें लोगों के मन को मोह लेती हैं।

देवधारा जलप्रपात का प्राचीन नाम devdhara watarfall ancient name

देवधारा जलप्रपात को वहां के स्थानीय लोगों द्वारा "देव दरहा" कहकर पुकारते हैं। शायद यही जलप्रपात का प्राचीन नाम है। जो आज देवधारा जलप्रपात devdhara watarfall के नाम से जानते हैं।

Devdhara Watarfall देवधारा जलप्रपात पर पुराने समय में देवी देवताओं का प्रसिद्ध स्थल हुआ करता था, जो आज नास्तिकवादी विचारधारा के कारण विलुप्त सा हो चुकी है।

देवधारा जलप्रपात का इतिहास

जन श्रुति के आधार पर स्थानीय लोगों का कहना है कि देव दरहा devdhara watarfall में पुराने समय में बहुत बड़ा प्रशिद्धि था , यहां पर से गुजरने वाले भूखे प्यासे लोगों के लिए पके हुए भोजन मिल जाया करतीं थीं। अगर कोई भूखा व्यक्ति भोजन के लिए आग्रह करने पर स्वयं देवी मानव का रुप धारण कर प्रकट होकर बर्तनों में पकी हुई भोजन प्रदान करती थी।

एक बार की बात है यहां किसी व्यक्ति ने भोजन के लिए आग्रह किया और स्वयं देवता ने मनुष्य का रूप धारण कर बर्तन में भोजन प्रदान किया परंतु भोजन ग्रहण करने पश्चात उस लालची व्यक्ति ने बर्तन को भी अपने साथ ले गया तभी से यह भोजन प्रदान करने की प्रसिद्धि लुप्त हो गई। इसी कारण है कि यहां के लोग इसे देवदरहा कहने लगे।

देवधारा जलप्रपात कहां स्थित है ?

देवधारा जलप्रपात devdhara jalprapat कुल्हाड़ी घाट और पायली कार्ड के बीच एक छोटी सी नदी पर जलप्रपात के रूप में प्रसिद्ध है।

देवधारा जलप्रपात जाने का मार्ग

Devdhara Watarfall Mainpur ग्राम कुल्हाड़ीघाट और हीरा खदान पैलीखंड के बीचोंबीच प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर देवधारा जलाशय है। देवभोग- रायपुर मुख्यमार्ग से डुमरपडाव गांव के पास से जांगडा पायलीखंड होते हुए देवदहरा पहुंचा जा सकता है।

दूसरा रास्ता मैनपुर से गड़ चिरौली मार्ग होते हुए कुल्हाड़ीघाट, बेसराझर से भी पहुंचा जा सकता है। वन विभाग ने यहां पहुंचने के लिए कच्ची सड़क बनवाई है।

सूखे के दिनों में चार पहिए वाहनों से भी देवधारा जलप्रपात पर पहुंचा जा सकता है बरसात के दिनों में देवधारा जलप्रपात पहुंचने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है परंतु चार पहिया वाहन भी जा सकती है।

देवधारा जलप्रपात पहुंचने के लिए रेल मार्ग की सुविधा नहीं है।

देवधारा जलप्रपात दो पहाडियों के बीच इसके ऊपर भाई दाहरा, हाथ दाहरा, नागरशील और कई रमणीय सरोवर हैं, जहां वर्ष भर पानी भरा रहता है। मैनपुर से 40 और गरियाबंद जिले से 87 किलोमीटर दूर देवधारा जलप्रपात का मनोरम दृश्य देखने लायक है। बारिश के दिनों में 60 से 70 फुट ऊंचाई से पानी जब खाई पर गिरता है, तो प्राकृतिक छटा देखने लायक रहती है।

देवस्थल के रूप में पहचान

देवधारा को देवस्थल के रूप में जाना जाता है। यहां दशहरा और नवरात्रि के मौके पर विशेष पूजा-अर्चना एवं अखंड ज्योति कलश स्थापना होती है।

देवधारा जलप्रपात पर्यटक स्थल के रूप में उभरने के लिए अभी दूर है। देवधारा जलप्रपात के जंगलों में साजा, बीजा, लेंडिया, हल्दु, धाओरा, आंवला, सरई एवं अमलतास जैसी प्रजातियों के वृक्ष भी पाए जाते है।

पक्षियों की प्रजातियां 20 से भी अधिक यह पर पाई जाती हैं, जिनमें से कई प्रवासी पक्षी शामिल हैं। इनमें से कुछ हैं फेजेन्ट, बुलबुल, ड्रोंगो, कठफोड़वा आदि, जंगली मुर्गी अभी यहां ज्यादा तादाद में पाई जाती हैं।