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बिजली दरों में वृद्धि का माकपा ने किया विरोध

बिजली दर,

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में वृद्धि का विरोध किया है और कहा है कि यह वृद्धि चौतरफा महंगाई को बढ़ाएगी, जिससे कोरोना संकट से जूझ रही आम जनता और बदहाल होगी।

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि बिजली दरों में वृद्धि के जरिये आम जनता पर 941 करोड़ रुपयों का अतिरिक्त बोझ डाला गया है, जबकि पुरानी दरों पर भी बिजली वितरण कंपनी 2000 करोड़ रुपयों के मुनाफे पर चल रही है। अतः यह अतिरिक्त बोझ डालना अनैतिक है।

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि बिजली कंपनी के पिछले कई वर्षों के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की लागत आम जनता से वसूलना राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों का भी प्रतीक है। आयोग द्वारा बिजली दरों में की गई 6.5% की औसत वृद्धि वास्तव में इस प्रदेश के 48 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उनके बिजली बिलों में 25 से 40% की वृद्धि लेकर आ रही है। इसी प्रकार कृषि कार्यों और लघु उद्योगों के लिए की गई वृद्धि खेती-किसानी और औद्योगिक उत्पादन तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। 

माकपा नेता ने कहा कि कोरोना संकट के कारण एक ओर प्रदेश की गरीब जनता की रोजी-रोटी खतरे में पड़ी है, वहीं उनको पर्याप्त खाद्यान्न, स्वास्थ्य सुविधाएं तक न दे पाने वाली और उनकी क्रय शक्ति में वृद्धि न कर सकने वाली कांग्रेस सरकार बिजली दरों में वृद्धि करके उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर एक और नया हमला कर रही है। आम जनता को लामबंद करके इस हमले का मुक़ाबला किया जाएगा तथा 9 अगस्त के देशव्यापी आंदोलन में प्रदेश स्तर पर इस वृद्धि का विरोध किया जाएगा।


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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) - CPI(M),छत्तीसगढ़ राज्य समिति,नूरानी चौक, राजा तालाब, रायपुर, छत्तीसगढ़ comrade