छत्तीसगढ़ में मनाया जा रहा है माता पहुंचानी का पर्व || sheetla mata festival 2019

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छत्तीसगढ़ में मनाया जा रहा है माता पहुंचानी का पर्व

 आज लगेगी माता के मंदिर में भीड़

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माता पहुंचानी का पर्व आदि काल से मनाया जा रहा है मुख्यतः यह पर्व छोटे गांवों एवं कस्बों में मनाया जाने वाला पर्व है जो कि इस पर्व में शीतला मंदिर में प्रसाद के रूप में लाई एवं रोटी चढ़ाकर माता को प्रसन्न किया जाता है इसमें किसी भी जाति वर्ग का भेदभाव नहीं है इसमें महिला पुरुष और बच्चे सभी शामिल होते हैं,
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इस पर्व की एक और खास बात है कि अपनी ससुराल गई हुई बेटी को बुलाकर इस पर्व में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है जिसमें अपनी बेटी के साथ उनके दमान (जमाई) भी परिवार के साथ आते हैं ,
      माता पहुंचानी का पर्व शीतला मां को प्रसन्न करने के लिए मनाया जाता है शीतला देवी के प्रसन्न होने से गांव में शांति रहती है रोग व्याधि का प्रकोप से बचने के लिए देवी को प्रसन्न करने का यह पर्व मनाया जाता है,
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         शीतला देवी को माता पहुंचाने पर्व में उसके मंदिर में सभी लोग जाकर प्रसाद के रूप में चावल के द्वारा बने हुए लाई एवं चावल से बनी हुई रोटी तथा दूध एवं नींबू का प्रसाद चढ़ाकर भोग लगाया जाता है माना जाता है कि शीतला माता की प्रसन्न होने से गांव की सभी देवी देवता प्रसन्न होते हैं एवं गांव में शांति व्यवस्था अच्छी होती है,

           गांव के लोगों का मानना यह भी है कि गांव में जब चेचक(फोड़ा-फुंसियां) वाली बीमारी होती है तो सबसे पहले शीतला मंदिर में ही जाकर गांव की मुखिया झांकर-पुजारी के द्वारा   अनुनय-वंदन किया जाता है एवं ठंडाई के रूप में दूध एवं नींबू का भोग लगाकर मनौती किया जाता है जिससे उक्त रोग शांत होती है,
        इस पर्व को मुख्यतः रथ द्वितीय रथ यात्रा पर्व के बाद ही मनाया जाता है जो कि अलग-अलग गांव में सप्ताह की फर्क होती है।